Competition Act 42अध्याय VI · Penalties
धारा 42 · आयोग के आदेशों का उल्लंघन।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [ 42. आयोग के आदेशों का उल्लंघन। --(1) आयोग अधिनियम के तहत अपनी शक्तियों के प्रयोग में दिए गए अपने आदेशों या निर्देशों के अनुपालन की जांच करवा सकता है।
(2) यदि कोई व्यक्ति, उचित प्रावधान के बिना, अधिनियम की धारा 27, 28, 31, 32, 33, 42ए और 43ए के तहत आयोग द्वारा जारी आदेशों या निर्देशों का पालन करने में विफल रहता है, तो उसे ऐसे गैर-अनुपालन के प्रत्येक दिन के लिए एक लाख रुपये तक के जुर्माने से दंडित किया जाएगा, जो आयोग द्वारा निर्धारित अधिकतम दस करोड़ रुपये तक सीमित होगा।
(3) यदि कोई व्यक्ति जारी किए गए आदेशों या निर्देशों का पालन नहीं करता है, या उपधारा (2) के तहत लगाए गए जुर्माने का भुगतान करने में विफल रहता है, तो धारा 39 के तहत किसी भी कार्यवाही पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उसे तीन वर्ष तक के कारावास, या पच्चीस करोड़ रुपये तक के जुर्माने, या दोनों से दंडित किया जाएगा, जैसा कि दिल्ली के मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट उचित समझें:
परंतु यह कि दिल्ली के मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट इस धारा के अंतर्गत किसी भी अपराध का संज्ञान तब तक नहीं लेंगे जब तक कि आयोग या उसके द्वारा अधिकृत किसी अधिकारी द्वारा शिकायत दर्ज न की गई हो।
(2) यदि कोई व्यक्ति, उचित प्रावधान के बिना, अधिनियम की धारा 27, 28, 31, 32, 33, 42ए और 43ए के तहत आयोग द्वारा जारी आदेशों या निर्देशों का पालन करने में विफल रहता है, तो उसे ऐसे गैर-अनुपालन के प्रत्येक दिन के लिए एक लाख रुपये तक के जुर्माने से दंडित किया जाएगा, जो आयोग द्वारा निर्धारित अधिकतम दस करोड़ रुपये तक सीमित होगा।
(3) यदि कोई व्यक्ति जारी किए गए आदेशों या निर्देशों का पालन नहीं करता है, या उपधारा (2) के तहत लगाए गए जुर्माने का भुगतान करने में विफल रहता है, तो धारा 39 के तहत किसी भी कार्यवाही पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उसे तीन वर्ष तक के कारावास, या पच्चीस करोड़ रुपये तक के जुर्माने, या दोनों से दंडित किया जाएगा, जैसा कि दिल्ली के मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट उचित समझें:
परंतु यह कि दिल्ली के मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट इस धारा के अंतर्गत किसी भी अपराध का संज्ञान तब तक नहीं लेंगे जब तक कि आयोग या उसके द्वारा अधिकृत किसी अधिकारी द्वारा शिकायत दर्ज न की गई हो।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 3 वर्ष
- जुर्माना
- जुर्माना — कोई विधिक सीमा नहीं, न्यायालय तय करेगा
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- अजमानतीय
- विचारण न्यायालय
- प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
इस धारा की अलग-अलग उपधाराओं में अलग दंड हैं; यहाँ अधिकतम दिखाया गया है।
प्रथम अनुसूची भाग II के नियम से निकाला गया — धारावार सूचीबद्ध नहीं
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