Competition Act 66अध्याय IX · Miscellaneous
धारा 66 · निरसन और बचत
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [(1) एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार अधिनियम, 1969 (1969 का 54) को इसके द्वारा निरस्त किया जाता है और उक्त अधिनियम की धारा 5 की उपधारा (1) के तहत स्थापित एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार आयोग (जिसे इसके बाद निरस्त अधिनियम कहा जाएगा) भंग हो जाएगा।
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(1ए) एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार अधिनियम, 1969 (1969 का 54) के निरसन से, यद्यपि, निम्नलिखित पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा:--
(क) निरस्त किए गए अधिनियम का पूर्व संचालन या उसके अधीन विधिवत किया गया कोई कार्य या सहन किया गया कोई कार्य; या
(ख) निरस्त किए गए अधिनियम के अधीन अर्जित, उपार्जित या उत्पन्न कोई अधिकार, विशेषाधिकार, दायित्व या देनदारी; या
(ग) निरस्त किए गए अधिनियम के तहत किसी उल्लंघन के संबंध में लगाया गया कोई जुर्माना, ज़ब्ती या दंड; या
(घ) उपर्युक्त किसी अधिकार, विशेषाधिकार, दायित्व, देनदारी, दंड, ज़ब्ती या सज़ा के संबंध में कोई कार्यवाही या उपाय शुरू किया जा सकता है, जारी रखा जा सकता है या लागू किया जा सकता है, और ऐसा कोई दंड, ज़ब्ती या सज़ा इस प्रकार लगाया या दिया जा सकता है मानो वह अधिनियम निरस्त न हुआ हो।]
(2) एकाधिकार और व्यापार व्यवहार प्रतिबंध आयोग के विघटन पर, एकाधिकार और व्यापार व्यवहार प्रतिबंध आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त व्यक्ति और जांच एवं पंजीकरण के सदस्य एवं महानिदेशक, अतिरिक्त, संयुक्त, उप या सहायक महानिदेशक एवं जांच एवं पंजीकरण के रूप में नियुक्त प्रत्येक अन्य व्यक्ति और उस आयोग का कोई भी अधिकारी एवं अन्य कर्मचारी जो विघटन से ठीक पहले ऐसे पदों पर आसीन था, अपने-अपने पद खाली कर देंगे और ऐसे अध्यक्ष एवं अन्य सदस्य अपने कार्यकाल या किसी सेवा अनुबंध की समय से पहले समाप्ति के लिए तीन महीने के वेतन एवं भत्तों से अधिक मुआवजे का दावा करने के हकदार होंगे।
बशर्ते कि जांच एवं पंजीकरण महानिदेशक, अतिरिक्त, संयुक्त, उप या सहायक जांच एवं पंजीकरण महानिदेशक या कोई भी अधिकारी या अन्य कर्मचारी, जिसे एकाधिकार एवं व्यापार व्यवहार आयोग के विघटन से ठीक पहले प्रतिनियुक्ति के आधार पर एकाधिकार एवं व्यापार व्यवहार आयोग में नियुक्त किया गया था, ऐसे विघटन पर, अपने मूल कैडर, मंत्रालय या विभाग में वापस आ जाएगा, जैसा भी मामला हो:
3. इसके अलावा, जांच एवं पंजीकरण महानिदेशक, अतिरिक्त, संयुक्त, उप या सहायक जांच एवं पंजीकरण महानिदेशक या कोई भी अधिकारी या अन्य कर्मचारी, जो एकाधिकार एवं व्यापार व्यवहार आयोग के विघटन से ठीक पहले नियमित आधार पर इस आयोग में कार्यरत था, ऐसे विघटन के बाद से क्रमशः भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग या अपीलीय न्यायाधिकरण का अधिकारी और कर्मचारी बन जाएगा, जैसा कि केंद्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है, और उसे पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य समान मामलों के संबंध में वही अधिकार और विशेषाधिकार प्राप्त होंगे जो उसे तब प्राप्त होते जब ऐसे एकाधिकार एवं व्यापार व्यवहार आयोग से संबंधित अधिकार भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग या अपीलीय न्यायाधिकरण को हस्तांतरित और निहित नहीं किए गए होते, और वह तब तक ऐसा ही बना रहेगा जब तक कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग या अपीलीय न्यायाधिकरण में उसका रोजगार विधिवत समाप्त नहीं हो जाता या जब तक कि उसके पारिश्रमिक, रोजगार की शर्तें और नियम विधिवत रूप से परिवर्तित नहीं हो जाते। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग या अपीलीय न्यायाधिकरण, जैसा भी मामला हो:]
इसके अलावा, औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (14 ऑफ 1947) या उस समय लागू किसी अन्य कानून में निहित किसी भी बात के बावजूद, एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार आयोग में कार्यरत किसी भी जांच एवं पंजीकरण महानिदेशक, अतिरिक्त, संयुक्त, उप या सहायक जांच एवं पंजीकरण महानिदेशक या किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी की सेवाओं का स्थानांतरण [भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग या अपीलीय न्यायाधिकरण, जैसा भी मामला हो] को होने पर, ऐसे जांच एवं पंजीकरण महानिदेशक, अतिरिक्त, संयुक्त, उप या सहायक जांच एवं पंजीकरण महानिदेशक या किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी को इस अधिनियम या उस समय लागू किसी अन्य कानून के तहत किसी भी प्रकार का मुआवजा प्राप्त करने का अधिकार नहीं होगा और ऐसे किसी भी दावे पर किसी भी न्यायालय, न्यायाधिकरण या अन्य प्राधिकरण द्वारा विचार नहीं किया जाएगा।
इसके अलावा, जहां एकाधिकार और व्यापार व्यवहार प्रतिबंध आयोग ने जांच एवं पंजीकरण महानिदेशक, अतिरिक्त, संयुक्त, उप या सहायक जांच एवं पंजीकरण महानिदेशकों या एकाधिकार एवं व्यापार व्यवहार आयोग में कार्यरत अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के लाभ के लिए भविष्य निधि, सेवानिवृत्ति, कल्याण या अन्य निधि स्थापित की है, तो उन अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों से संबंधित धनराशि, जिनकी सेवाएं इस अधिनियम के तहत [भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग या अपीलीय न्यायाधिकरण, जैसा भी मामला हो] को स्थानांतरित कर दी गई हैं, एकाधिकार एवं व्यापार व्यवहार प्रतिबंध आयोग के विघटन पर, ऐसी भविष्य निधि, सेवानिवृत्ति, कल्याण या अन्य निधि में जमा धनराशि में से स्थानांतरित हो जाएगी और [भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग या अपीलीय न्यायाधिकरण, जैसा भी मामला हो] को हस्तांतरित हो जाएगी, और इस प्रकार स्थानांतरित धनराशि का निपटान उक्त आयोग या न्यायाधिकरण द्वारा, जैसा भी मामला हो, निर्धारित तरीके से किया जाएगा।
7 [(3) एकाधिकारवादी व्यापार प्रथाओं या प्रतिबंधात्मक व्यापार प्रथाओं से संबंधित सभी मामले जो एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार प्रथा आयोग के समक्ष लंबित हैं (जिनमें ऐसे मामले भी शामिल हैं जिनमें किसी अनुचित व्यापार प्रथा का भी आरोप लगाया गया है), 8 [प्रतिस्पर्धा संशोधन अधिनियम, 2009 (39 ऑफ 2009) के प्रारंभ होने पर] अपीलीय न्यायाधिकरण को स्थानांतरित कर दिए जाएंगे और अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा निरस्त अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार उनका निर्णय किया जाएगा मानो वह अधिनियम निरस्त नहीं किया गया हो।
9 [ स्पष्टीकरण-- संशय दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि इस उपधारा, उपधारा (4) और उपधारा (5) में संदर्भित सभी मामलों में एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार अधिनियम, 1969 (54 ऑफ 1969) की धारा 12बी के तहत हानि या क्षतिपूर्ति के लिए किए गए सभी आवेदन शामिल माने जाएंगे, जैसा कि यह इसके निरसन से पहले लागू था।]
(4) उप-धारा (3) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, एकाधिकार एवं प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार अधिनियम, 1969 (1969 का 54) की धारा 36ए की उप-धारा (1) के खंड (x) में निर्दिष्ट मामलों के अतिरिक्त, अनुचित व्यापार व्यवहार से संबंधित सभी मामले जो एकाधिकार एवं प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार आयोग के समक्ष [प्रतिस्पर्धा (संशोधन) अधिनियम, 2009 (2009 का 39) के प्रारंभ होने से ठीक पहले लंबित थे, ऐसे प्रारंभ होने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 (1986 का 68) के अंतर्गत गठित राष्ट्रीय आयोग को हस्तांतरित कर दिए जाएँगे और राष्ट्रीय आयोग ऐसे मामलों का निपटारा ऐसे करेगा मानो वे उस अधिनियम के अंतर्गत दायर किए गए मामले हों: बशर्ते कि राष्ट्रीय आयोग, यदि वह उचित समझे, तो इस उप-धारा के अंतर्गत उसे हस्तांतरित किए गए किसी भी मामले को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 (1986 का 68) की धारा 9 के अंतर्गत स्थापित संबंधित राज्य आयोग को हस्तांतरित कर सकता है और वह राज्य आयोग ऐसे मामलों का निपटारा करेगा। ऐसा मामला मानो उस अधिनियम के तहत दायर किया गया हो:
11 [इसके अलावा यह भी प्रावधान है कि अनुचित व्यापार प्रथाओं से संबंधित वे सभी मामले जो इस उपधारा के अंतर्गत राष्ट्रीय आयोग के समक्ष राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त होने की तिथि को या उससे पहले लंबित थे, उस तिथि से अपीलीय न्यायाधिकरण को हस्तांतरित कर दिए जाएंगे और निरस्त अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा उनका निर्णय किया जाएगा, मानो वह अधिनियम निरस्त न हुआ हो।]
12 [(5) एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार अधिनियम, 1969 (54 ऑफ 1969) की धारा 36ए की उपधारा (1) के खंड (x) में निर्दिष्ट अनुचित व्यापार व्यवहारों से संबंधित सभी मामले, जो एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार आयोग के समक्ष लंबित हैं, 13 [प्रतिस्पर्धा (संशोधन) अधिनियम, 2009 (39 ऑफ 2009) के प्रारंभ होने पर], अपीलीय न्यायाधिकरण को स्थानांतरित कर दिए जाएंगे और अपीलीय न्यायाधिकरण ऐसे मामलों का निपटारा ऐसे करेगा जैसे कि वे उस अधिनियम के तहत दायर किए गए मामले हों।]
(6) अनुचित व्यापार प्रथाओं से संबंधित मामलों को छोड़कर, इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले जांच एवं पंजीकरण महानिदेशक के समक्ष लंबित सभी जांचें या कार्यवाही, ऐसे प्रारंभ होने पर, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग को हस्तांतरित कर दी जाएंगी, और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ऐसी जांच या कार्यवाही को अपने उचित तरीके से संचालित कर सकता है या संचालित करने का आदेश दे सकता है।
(7) अनुचित व्यापार प्रथाओं से संबंधित सभी जांचें या कार्यवाही, एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार अधिनियम, 1969 (54 ऑफ 1969) की धारा 36ए की उपधारा (1) के खंड (x) में निर्दिष्ट मामलों के अलावा, जो इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले या उस दिन जांच और पंजीकरण महानिदेशक के समक्ष लंबित थीं, ऐसे प्रारंभ होने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 (68 ऑफ 1986) के तहत गठित राष्ट्रीय आयोग को हस्तांतरित कर दी जाएंगी और राष्ट्रीय आयोग ऐसी जांच या कार्यवाही को उस तरीके से संचालित कर सकता है या संचालित करने का आदेश दे सकता है जैसा वह उचित समझे।
14 [बशर्ते कि अनुचित व्यापार प्रथाओं से संबंधित सभी जांचें या कार्यवाही, जो राष्ट्रीय आयोग के समक्ष राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त होने की तिथि को या उससे पहले लंबित थीं, उस तिथि से अपीलीय न्यायाधिकरण को हस्तांतरित कर दी जाएंगी और अपीलीय न्यायाधिकरण ऐसी जांच या कार्यवाही को अपने उचित तरीके से संचालित कर सकता है या संचालित करने का आदेश दे सकता है।]
(8) एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार अधिनियम, 1969 (54 ऑफ 1969) की धारा 36ए की उपधारा (1) के खंड (x) में निर्दिष्ट अनुचित व्यापार व्यवहारों से संबंधित सभी जांचें या कार्यवाही, जो इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले या उस दिन जांच एवं पंजीकरण महानिदेशक के समक्ष लंबित थीं, ऐसे प्रारंभ होने पर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग को हस्तांतरित हो जाएंगी और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ऐसी जांच को उस तरीके से संचालित कर सकता है या संचालित करने का आदेश दे सकता है जैसा वह उचित समझे।
(9) उपधारा (3) से (8) के अधीन अन्यथा प्रदान किए जाने के अलावा, एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार आयोग के समक्ष लंबित सभी मामले या कार्यवाही समाप्त हो जाएंगी।
(10) उपधारा (3) से (8) में निर्दिष्ट विशिष्ट मामलों का उल्लेख, निरसन के प्रभाव के संबंध में सामान्य खंड अधिनियम, 1897 (10 ऑफ 1897) की धारा 6 के सामान्य अनुप्रयोग पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
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(1ए) एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार अधिनियम, 1969 (1969 का 54) के निरसन से, यद्यपि, निम्नलिखित पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा:--
(क) निरस्त किए गए अधिनियम का पूर्व संचालन या उसके अधीन विधिवत किया गया कोई कार्य या सहन किया गया कोई कार्य; या
(ख) निरस्त किए गए अधिनियम के अधीन अर्जित, उपार्जित या उत्पन्न कोई अधिकार, विशेषाधिकार, दायित्व या देनदारी; या
(ग) निरस्त किए गए अधिनियम के तहत किसी उल्लंघन के संबंध में लगाया गया कोई जुर्माना, ज़ब्ती या दंड; या
(घ) उपर्युक्त किसी अधिकार, विशेषाधिकार, दायित्व, देनदारी, दंड, ज़ब्ती या सज़ा के संबंध में कोई कार्यवाही या उपाय शुरू किया जा सकता है, जारी रखा जा सकता है या लागू किया जा सकता है, और ऐसा कोई दंड, ज़ब्ती या सज़ा इस प्रकार लगाया या दिया जा सकता है मानो वह अधिनियम निरस्त न हुआ हो।]
(2) एकाधिकार और व्यापार व्यवहार प्रतिबंध आयोग के विघटन पर, एकाधिकार और व्यापार व्यवहार प्रतिबंध आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त व्यक्ति और जांच एवं पंजीकरण के सदस्य एवं महानिदेशक, अतिरिक्त, संयुक्त, उप या सहायक महानिदेशक एवं जांच एवं पंजीकरण के रूप में नियुक्त प्रत्येक अन्य व्यक्ति और उस आयोग का कोई भी अधिकारी एवं अन्य कर्मचारी जो विघटन से ठीक पहले ऐसे पदों पर आसीन था, अपने-अपने पद खाली कर देंगे और ऐसे अध्यक्ष एवं अन्य सदस्य अपने कार्यकाल या किसी सेवा अनुबंध की समय से पहले समाप्ति के लिए तीन महीने के वेतन एवं भत्तों से अधिक मुआवजे का दावा करने के हकदार होंगे।
बशर्ते कि जांच एवं पंजीकरण महानिदेशक, अतिरिक्त, संयुक्त, उप या सहायक जांच एवं पंजीकरण महानिदेशक या कोई भी अधिकारी या अन्य कर्मचारी, जिसे एकाधिकार एवं व्यापार व्यवहार आयोग के विघटन से ठीक पहले प्रतिनियुक्ति के आधार पर एकाधिकार एवं व्यापार व्यवहार आयोग में नियुक्त किया गया था, ऐसे विघटन पर, अपने मूल कैडर, मंत्रालय या विभाग में वापस आ जाएगा, जैसा भी मामला हो:
3. इसके अलावा, जांच एवं पंजीकरण महानिदेशक, अतिरिक्त, संयुक्त, उप या सहायक जांच एवं पंजीकरण महानिदेशक या कोई भी अधिकारी या अन्य कर्मचारी, जो एकाधिकार एवं व्यापार व्यवहार आयोग के विघटन से ठीक पहले नियमित आधार पर इस आयोग में कार्यरत था, ऐसे विघटन के बाद से क्रमशः भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग या अपीलीय न्यायाधिकरण का अधिकारी और कर्मचारी बन जाएगा, जैसा कि केंद्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है, और उसे पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य समान मामलों के संबंध में वही अधिकार और विशेषाधिकार प्राप्त होंगे जो उसे तब प्राप्त होते जब ऐसे एकाधिकार एवं व्यापार व्यवहार आयोग से संबंधित अधिकार भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग या अपीलीय न्यायाधिकरण को हस्तांतरित और निहित नहीं किए गए होते, और वह तब तक ऐसा ही बना रहेगा जब तक कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग या अपीलीय न्यायाधिकरण में उसका रोजगार विधिवत समाप्त नहीं हो जाता या जब तक कि उसके पारिश्रमिक, रोजगार की शर्तें और नियम विधिवत रूप से परिवर्तित नहीं हो जाते। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग या अपीलीय न्यायाधिकरण, जैसा भी मामला हो:]
इसके अलावा, औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (14 ऑफ 1947) या उस समय लागू किसी अन्य कानून में निहित किसी भी बात के बावजूद, एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार आयोग में कार्यरत किसी भी जांच एवं पंजीकरण महानिदेशक, अतिरिक्त, संयुक्त, उप या सहायक जांच एवं पंजीकरण महानिदेशक या किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी की सेवाओं का स्थानांतरण [भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग या अपीलीय न्यायाधिकरण, जैसा भी मामला हो] को होने पर, ऐसे जांच एवं पंजीकरण महानिदेशक, अतिरिक्त, संयुक्त, उप या सहायक जांच एवं पंजीकरण महानिदेशक या किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी को इस अधिनियम या उस समय लागू किसी अन्य कानून के तहत किसी भी प्रकार का मुआवजा प्राप्त करने का अधिकार नहीं होगा और ऐसे किसी भी दावे पर किसी भी न्यायालय, न्यायाधिकरण या अन्य प्राधिकरण द्वारा विचार नहीं किया जाएगा।
इसके अलावा, जहां एकाधिकार और व्यापार व्यवहार प्रतिबंध आयोग ने जांच एवं पंजीकरण महानिदेशक, अतिरिक्त, संयुक्त, उप या सहायक जांच एवं पंजीकरण महानिदेशकों या एकाधिकार एवं व्यापार व्यवहार आयोग में कार्यरत अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के लाभ के लिए भविष्य निधि, सेवानिवृत्ति, कल्याण या अन्य निधि स्थापित की है, तो उन अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों से संबंधित धनराशि, जिनकी सेवाएं इस अधिनियम के तहत [भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग या अपीलीय न्यायाधिकरण, जैसा भी मामला हो] को स्थानांतरित कर दी गई हैं, एकाधिकार एवं व्यापार व्यवहार प्रतिबंध आयोग के विघटन पर, ऐसी भविष्य निधि, सेवानिवृत्ति, कल्याण या अन्य निधि में जमा धनराशि में से स्थानांतरित हो जाएगी और [भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग या अपीलीय न्यायाधिकरण, जैसा भी मामला हो] को हस्तांतरित हो जाएगी, और इस प्रकार स्थानांतरित धनराशि का निपटान उक्त आयोग या न्यायाधिकरण द्वारा, जैसा भी मामला हो, निर्धारित तरीके से किया जाएगा।
7 [(3) एकाधिकारवादी व्यापार प्रथाओं या प्रतिबंधात्मक व्यापार प्रथाओं से संबंधित सभी मामले जो एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार प्रथा आयोग के समक्ष लंबित हैं (जिनमें ऐसे मामले भी शामिल हैं जिनमें किसी अनुचित व्यापार प्रथा का भी आरोप लगाया गया है), 8 [प्रतिस्पर्धा संशोधन अधिनियम, 2009 (39 ऑफ 2009) के प्रारंभ होने पर] अपीलीय न्यायाधिकरण को स्थानांतरित कर दिए जाएंगे और अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा निरस्त अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार उनका निर्णय किया जाएगा मानो वह अधिनियम निरस्त नहीं किया गया हो।
9 [ स्पष्टीकरण-- संशय दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि इस उपधारा, उपधारा (4) और उपधारा (5) में संदर्भित सभी मामलों में एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार अधिनियम, 1969 (54 ऑफ 1969) की धारा 12बी के तहत हानि या क्षतिपूर्ति के लिए किए गए सभी आवेदन शामिल माने जाएंगे, जैसा कि यह इसके निरसन से पहले लागू था।]
(4) उप-धारा (3) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, एकाधिकार एवं प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार अधिनियम, 1969 (1969 का 54) की धारा 36ए की उप-धारा (1) के खंड (x) में निर्दिष्ट मामलों के अतिरिक्त, अनुचित व्यापार व्यवहार से संबंधित सभी मामले जो एकाधिकार एवं प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार आयोग के समक्ष [प्रतिस्पर्धा (संशोधन) अधिनियम, 2009 (2009 का 39) के प्रारंभ होने से ठीक पहले लंबित थे, ऐसे प्रारंभ होने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 (1986 का 68) के अंतर्गत गठित राष्ट्रीय आयोग को हस्तांतरित कर दिए जाएँगे और राष्ट्रीय आयोग ऐसे मामलों का निपटारा ऐसे करेगा मानो वे उस अधिनियम के अंतर्गत दायर किए गए मामले हों: बशर्ते कि राष्ट्रीय आयोग, यदि वह उचित समझे, तो इस उप-धारा के अंतर्गत उसे हस्तांतरित किए गए किसी भी मामले को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 (1986 का 68) की धारा 9 के अंतर्गत स्थापित संबंधित राज्य आयोग को हस्तांतरित कर सकता है और वह राज्य आयोग ऐसे मामलों का निपटारा करेगा। ऐसा मामला मानो उस अधिनियम के तहत दायर किया गया हो:
11 [इसके अलावा यह भी प्रावधान है कि अनुचित व्यापार प्रथाओं से संबंधित वे सभी मामले जो इस उपधारा के अंतर्गत राष्ट्रीय आयोग के समक्ष राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त होने की तिथि को या उससे पहले लंबित थे, उस तिथि से अपीलीय न्यायाधिकरण को हस्तांतरित कर दिए जाएंगे और निरस्त अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा उनका निर्णय किया जाएगा, मानो वह अधिनियम निरस्त न हुआ हो।]
12 [(5) एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार अधिनियम, 1969 (54 ऑफ 1969) की धारा 36ए की उपधारा (1) के खंड (x) में निर्दिष्ट अनुचित व्यापार व्यवहारों से संबंधित सभी मामले, जो एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार आयोग के समक्ष लंबित हैं, 13 [प्रतिस्पर्धा (संशोधन) अधिनियम, 2009 (39 ऑफ 2009) के प्रारंभ होने पर], अपीलीय न्यायाधिकरण को स्थानांतरित कर दिए जाएंगे और अपीलीय न्यायाधिकरण ऐसे मामलों का निपटारा ऐसे करेगा जैसे कि वे उस अधिनियम के तहत दायर किए गए मामले हों।]
(6) अनुचित व्यापार प्रथाओं से संबंधित मामलों को छोड़कर, इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले जांच एवं पंजीकरण महानिदेशक के समक्ष लंबित सभी जांचें या कार्यवाही, ऐसे प्रारंभ होने पर, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग को हस्तांतरित कर दी जाएंगी, और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ऐसी जांच या कार्यवाही को अपने उचित तरीके से संचालित कर सकता है या संचालित करने का आदेश दे सकता है।
(7) अनुचित व्यापार प्रथाओं से संबंधित सभी जांचें या कार्यवाही, एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार अधिनियम, 1969 (54 ऑफ 1969) की धारा 36ए की उपधारा (1) के खंड (x) में निर्दिष्ट मामलों के अलावा, जो इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले या उस दिन जांच और पंजीकरण महानिदेशक के समक्ष लंबित थीं, ऐसे प्रारंभ होने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 (68 ऑफ 1986) के तहत गठित राष्ट्रीय आयोग को हस्तांतरित कर दी जाएंगी और राष्ट्रीय आयोग ऐसी जांच या कार्यवाही को उस तरीके से संचालित कर सकता है या संचालित करने का आदेश दे सकता है जैसा वह उचित समझे।
14 [बशर्ते कि अनुचित व्यापार प्रथाओं से संबंधित सभी जांचें या कार्यवाही, जो राष्ट्रीय आयोग के समक्ष राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त होने की तिथि को या उससे पहले लंबित थीं, उस तिथि से अपीलीय न्यायाधिकरण को हस्तांतरित कर दी जाएंगी और अपीलीय न्यायाधिकरण ऐसी जांच या कार्यवाही को अपने उचित तरीके से संचालित कर सकता है या संचालित करने का आदेश दे सकता है।]
(8) एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार अधिनियम, 1969 (54 ऑफ 1969) की धारा 36ए की उपधारा (1) के खंड (x) में निर्दिष्ट अनुचित व्यापार व्यवहारों से संबंधित सभी जांचें या कार्यवाही, जो इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले या उस दिन जांच एवं पंजीकरण महानिदेशक के समक्ष लंबित थीं, ऐसे प्रारंभ होने पर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग को हस्तांतरित हो जाएंगी और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ऐसी जांच को उस तरीके से संचालित कर सकता है या संचालित करने का आदेश दे सकता है जैसा वह उचित समझे।
(9) उपधारा (3) से (8) के अधीन अन्यथा प्रदान किए जाने के अलावा, एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार आयोग के समक्ष लंबित सभी मामले या कार्यवाही समाप्त हो जाएंगी।
(10) उपधारा (3) से (8) में निर्दिष्ट विशिष्ट मामलों का उल्लेख, निरसन के प्रभाव के संबंध में सामान्य खंड अधिनियम, 1897 (10 ऑफ 1897) की धारा 6 के सामान्य अनुप्रयोग पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
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